भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और तेल आयात पर निर्भरता घटाने के लिए अब एक साथ दो मोर्चों पर काम कर रहा है। एक तरफ सरकार घरेलू स्तर पर अंडमान सागर में तेल के विशाल भंडार खोजने की उम्मीद कर रही है, तो दूसरी तरफ निजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियां वैश्विक बाजार में नए समीकरण साध रही हैं। इसी कड़ी में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने एक बड़ा कदम उठाते हुए लगभग एक साल के अंतराल के बाद वेनेजुएला से कच्चे तेल की खरीद फिर से शुरू कर दी है।

अंडमान सागर: क्या यह भारत का नया ‘गुयाना’ साबित होगा?

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में मीडिया से बातचीत के दौरान एक बेहद महत्वपूर्ण संभावना जताई है। उनका मानना है कि अंडमान सागर में तेल का एक ‘परिवर्तनकारी’ भंडार छिपा हो सकता है। पुरी ने इस संभावित खोज की तुलना गुयाना में हेस कॉर्पोरेशन और CNOOC द्वारा की गई बड़ी खोजों से की है। गौरतलब है कि तेल भंडार के मामले में गुयाना दुनिया में 17वें स्थान पर है, जहाँ अनुमानित 11.6 बिलियन बैरल तेल और गैस का भंडार मौजूद है।

केंद्रीय मंत्री का कहना है कि यह केवल समय की बात है कि कब हम अंडमान में गुयाना जैसा कोई विशाल भंडार खोज निकालते हैं। इस दिशा में प्रयास लगातार जारी हैं। हरदीप सिंह पुरी ने अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव का जिक्र करते हुए कहा कि अगर भारत अंडमान क्षेत्र में गुयाना के बराबर तेल भंडार खोजने में सफल हो जाता है, तो यह देश की 3.7 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था को 20 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में बदलने की क्षमता रखता है। इससे न केवल घरेलू उत्पादन बढ़ेगा बल्कि दूसरे देशों पर भारत की निर्भरता भी काफी हद तक कम हो जाएगी।

आयात पर भारी निर्भरता और मौजूदा चुनौतियां

भले ही भविष्य की उम्मीदें अंडमान पर टिकी हों, लेकिन वर्तमान हकीकत यह है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक दूसरे देशों पर निर्भर है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है, जो अमेरिका और चीन के बाद आता है। आंकड़ों के मुताबिक, भारत अपनी घरेलू खपत का लगभग 85 से 88 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। मौजूदा समय में भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में इराक, सऊदी अरब, रूस और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) शामिल हैं। इतनी बड़ी निर्भरता देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जिसे कम करने के लिए ही घरेलू खोज अभियानों में तेजी लाई जा रही है।

रिलायंस ने फिर खोला वेनेजुएला का रास्ता

जहां सरकार घरेलू मोर्चे पर सक्रिय है, वहीं कॉरपोरेट जगत वैश्विक अवसरों का लाभ उठाने में पीछे नहीं है। व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स का संचालन करने वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज ने वेनेजुएला से 20 लाख (2 मिलियन) बैरल कच्चा तेल खरीदा है। रिलायंस ने यह सौदा तेल व्यापारी ‘विटोल’ (Vitol) के माध्यम से किया है।

यह खरीद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रिलायंस ने करीब एक साल बाद दक्षिण अमेरिकी देश से तेल का आयात किया है। इस सौदे के पीछे हालिया भू-राजनीतिक घटनाक्रमों का बड़ा हाथ है। खबरों के मुताबिक, पिछले महीने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के लिए चलाए गए अमेरिकी सैन्य अभियान और उसके बाद अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के साथ हुए आपूर्ति समझौते के बाद समीकरण बदले हैं। इसके चलते ट्रेडिंग हाउस विटोल और ट्रैfigura (Trafigura) को वेनेजुएला के तेल की मार्केटिंग और बिक्री के लिए अमेरिकी लाइसेंस प्रदान किए गए हैं।

कीमत और डिलीवरी का गणित

रिलायंस के लिए यह सौदा आर्थिक रूप से भी काफी फायदेमंद नजर आ रहा है। सूत्रों की मानें तो अप्रैल में डिलीवरी के लिए खरीदे गए इस वेनेजुएलाई कच्चे तेल पर रिलायंस को ICE ब्रेंट के मुकाबले लगभग 6.5 से 7 डॉलर प्रति बैरल की छूट (डिस्काउंट) मिली है। हालांकि, इस मामले पर टिप्पणी के लिए भेजे गए ईमेल का रिलायंस की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया और विटोल ने भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।