2 साल बाद फिर से छलकी जयसमंद झील, रात करीब 12.32 मिनट पर छलका जयसमन्द झील का पानी



जयसमंद झील के ओवरफ्लो होने का लम्बा इंतजार खत्म हुआ |


उदयपुर जिले में स्थित एशिया की प्रथम मानव निर्मित मीठे पानी की जयसमन्द झील में क्षेत्र की नदियों व नालों से पानी की अच्छी आवक के चलते रात 12.32 मिनट पर छलक उठा, साढे सत्ताईस फीट भराव क्षमता वाली इस विश्व प्रसिद्ध झील में उपरी क्षेत्र की झामरी, गोमती सहित नौ नदियों व सबसे बडे वगुरवा सहित 99 नालों से पानी की आवक होती है



एशिया की दूसरी सबसे बड़ी कृत्रिम झील जयसमंद आखिर मॉनसून के आखिरी दौर में छलक उठेगी । उदयपुर से 51 किमी. दूर दक्षिण-पूर्व की ओर उदयपुर-सलूंबर मार्ग पर स्थित जयसमंद झील की प्राकृतिक खूबसूसरती और भव्यता देखकर लोग दांतो तले ऊँगली दबा लेते है। बांध की स्थापत्य कला की खूबसूरती से जयसमंद झील बरसों से पर्यटकों के आकर्षण का महत्वपूर्ण केंद्र बनी हुई है। करीब 2 साल बाद दोबारा झील फिर से लबालब हुई है। जयसमंद झील 100 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैली गोविंद बल्लभ पंत सागर के बाद भारत की दूसरी सबसे बड़ी मानव निर्मित झील है।



महाराणा जय सिंह ने खुद 1685 में जयसमंद झील ( ढेबर झील) का निर्माण करवाया था। 36 वर्ग मील के क्षेत्र को कवर करते हुए यह तब तक एशिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित झील बनी रही जब तक कि 1902 में अंग्रेजों ने मिस्र में असवान बांध का निर्माण नहीं किया था। पानी की कमी की वजह से जय सिंह के शासनकाल के समय इस झील का निर्माण हुआ था। अपने पिता (जिन्होंने राजसमंद झील का निर्माण किया था) के नक्शेकदम पर चलते हुए महाराणा ने गोमती नदी पर एक विशाल तटबंध बनाने का निर्णय लिया, यह डेम 36.6 मीटर ऊँचा है। इस झील का नाम उन्होंने अपने खुद के नाम पर रखा और इसे ‘विजय का महासागर’ या जयसमंद कहा जाने लगा। यह झील जयसमंद वन्यजीव अभयारण्य से घिरी हुई है जो कई तरह के दुर्लभ जानवरों और प्रवासी पक्षियों का आवास स्थान है।






रिपोर्ट : देवानंद दमामी 
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