वैज्ञानिकों के लिए चंद्रमा लगातार आश्चर्य का केंद्र बना हुआ है। हाल ही में, भारत और चीन के चंद्र मिशनों ने दो महत्वपूर्ण खोजें की हैं, जो सौर मंडल की वर्तमान गतिविधियों और इसके प्राचीन इतिहास, दोनों पर नई रोशनी डालती हैं। एक ओर जहां भारत के चंद्रयान-2 ने पहली बार किसी सौर तूफान का चंद्रमा पर सीधा असर दर्ज किया, वहीं चीन के चांग’ई-6 मिशन को चंद्रमा की दूसरी ओर से दुर्लभ उल्कापिंडों के अवशेष मिले हैं।
चंद्रयान-2 ने दर्ज की सौर तूफान की प्रतिक्रिया
भारत के चंद्रयान-2 ऑर्बिटर ने, जो वर्तमान में चंद्रमा की परिक्रमा कर रहा है, एक दुर्लभ अवलोकन किया है। इसने सूर्य से निकले कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई) या सौर तूफान के चंद्रमा की सतह पर पड़ने वाले प्रभाव को पहली बार रिकॉर्ड किया। यह अभूतपूर्व अवलोकन चंद्रयान-2 पर लगे ‘चंद्राज एटमॉस्फेरिक कंपोजिशन एक्सप्लोरर-2’ (CHACE-2) उपकरण द्वारा किया गया।
चंद्र बहिर्मंडल पर सीएमई का प्रभाव
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के शोधकर्ताओं ने उल्लेख किया कि 10 मई, 2024 को सूर्य से निकले सीएमई के तीव्र प्रवाह ने चंद्रमा को प्रभावित किया। चूंकि चंद्रमा का अपना कोई चुंबकीय क्षेत्र नहीं है, इसलिए ये कण सीधे सतह से टकराए। इस टकराव ने चंद्र सतह से परमाणुओं को उखाड़ दिया और उन्हें चंद्रमा के बेहद पतले वायुमंडल, जिसे ‘बहिर्मंडल’ (exosphere) कहा जाता है, में मुक्त कर दिया।
चंद्रमा का बहिर्मंडल गैस के परमाणुओं और अणुओं से बना है, जो लगभग न के बराबर आपस में संपर्क करते हैं। यह सौर विकिरण, सौर हवा और उल्कापिंडों के प्रभाव से बनता है। CHACE-2 के अवलोकनों से पता चला कि जब सीएमई चंद्रमा से टकराया, तो चंद्रमा के दिन वाले हिस्से के बहिर्मंडल के कुल दबाव और घनत्व में कई गुना वृद्धि हुई। इसरो के अनुसार, यह अवलोकन चंद्रमा पर ‘अंतरिक्ष के मौसम’ के प्रभाव को समझने और भविष्य में वहां वैज्ञानिक अड्डे बनाने की चुनौतियों का आकलन करने में मदद करेगा।
चीन के चांग’ई-6 को मिले दुर्लभ अवशेष
जहां भारत का मिशन वर्तमान घटनाओं का अध्ययन कर रहा है, वहीं चीन के चांग’ई-6 मिशन ने चंद्रमा के अतीत के रहस्यों से पर्दा उठाया है। चांग’ई-6 मिशन ने चंद्रमा के दूर वाले हिस्से पर स्थित सबसे बड़े और सबसे पुराने ज्ञात क्रेटर ‘दक्षिणी ध्रुव-एटकेन बेसिन’ से लगभग दो किलोग्राम मिट्टी के नमूने एकत्र किए। इन नमूनों का विश्लेषण करते हुए, चीनी वैज्ञानिकों ने एक अभूतपूर्व खोज की है।
बाहरी सौर मंडल से आए CI कॉन्ड्राइट्स
वैज्ञानिकों को इन नमूनों में ‘सीआई कॉन्ड्राइट्स’ (CI chondrites) के नाम से जाने जाने वाले दुर्लभ टुकड़े मिले हैं। ये कार्बन-समृद्ध उल्कापिंड हैं जो आमतौर पर बाहरी सौर मंडल (Inner Solar System से बहुत दूर) में उत्पन्न होते हैं और पानी तथा कार्बनिक पदार्थों से भरपूर होते हैं। यह खोज, जो प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित हुई है, यह बताती है कि सौर मंडल के दूर के हिस्सों से सामग्री आंतरिक ग्रहों की ओर आ सकती है, जिसने चंद्रमा और पृथ्वी को प्रभावित किया।
सौर मंडल के इतिहास का प्राकृतिक संग्रह
पृथ्वी के विपरीत, चंद्रमा पर वायुमंडल की कमी और भूवैज्ञानिक गतिविधि न होने के कारण ये प्राचीन उल्कापिंड के टुकड़े लगभग अपरिवर्तित रूप में संरक्षित रहते हैं। यह चंद्रमा को प्रारंभिक सौर मंडल के इतिहास का एक अनूठा प्राकृतिक संग्रह (archive) बनाता है। उन्नत माइक्रोस्कोपी और आइसोटोपिक विश्लेषण का उपयोग करते हुए, शोधकर्ताओं ने पुष्टि की कि ये छोटे टुकड़े सीआई कॉन्ड्राइट्स से मेल खाते हैं, जो पृथ्वी पर ज्ञात सभी उल्कापिंडों में 1% से भी कम हैं।
इन टुकड़ों में पानी से भरपूर खनिजों की उपस्थिति इस बात पर महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करती है कि अरबों साल पहले कार्बनयुक्त क्षुद्रग्रहों के माध्यम से चंद्रमा और संभवतः पृथ्वी तक पानी और कार्बनिक यौगिक (जीवन के लिए आवश्यक सामग्री) कैसे पहुंचे। यह खोज सौर मंडल के निर्माण के मौजूदा मॉडलों को चुनौती दे सकती है और यह समझने में मदद कर सकती है कि हमारे ग्रहों पर जीवन के लिए जरूरी चीजें कैसे वितरित हुईं।
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